लॉकडाउन में आउटडोर एक्टिविटी कम होने से बच्चे हो रहे हैं चिड़चिड़े, डॉ. बोले- शेड्यूल बनाकर बच्चों को रखें व्यस्त
लॉकडाउन में घर के अंदर रह-रहकर बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। इसके कारण बच्चे आपस में झगड़ भी रहे हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि स्कूल पूरी तरह से बंद और आउटडोर एक्टिविटी भी करीब-करीब बंद हो गई है। इसकी वजह से बच्चों में चिड़चिड़ापन आ रहा है। शेड्यूल के मुताबिक खाने-पीने और इंडोर गतिविधियों में व्यस्त रहने से बच्चों का चिड़चिड़ापन कम हो सकता है।
समय पर खाना देने और नींद भी पूरी करने की दी सलाह
लॉकडाउन में अस्पतालों के टेली कंसल्टेशन में बच्चों के चिड़चिड़े होने पर भी लोग डॉक्टरों से राय ले रहे हैं। अस्पतालों के मनोचिकित्सा विभाग में बच्चों के चिड़चिड़ेपन से जुड़े अनेक सवाल लोग पूछ रहे हैं। एम्स में टेली कंसलटेशन में लोग बता रहे हैं कि उनके बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। जहां छोटे बच्चे एक से ज्यादा हैं, वहां आपस में झगड़ने की बात भी परिजन बता रहे हैं। टेली कंसल्टेशन के दौरान एक परिजन ने कहा कि 5 साल की बच्ची है। लॉकडाउन से पहले स्कूल जाती थी तो ठीक था, मगर लॉकडाउन के बाद जबसे वह घर पर है चिड़चिड़ी हो गई है। कुछ कहते ही रोने लगती है। इस सवाल पर अस्पताल के डॉक्टर ने कहा कि जब बच्ची स्कूल जाती थी तो व्यस्त रहती थी। वहां दूसरे बच्चों के साथ खेलना होता होगा, मगर लॉकडाउन में उसके साथ कोई खेलने वाला नहीं है। आउटडोर एक्टिविटी कम हो गई है, जिसके कारण वह चिड़चिड़ी हो गई है।
बच्चों के साथ खेले गेम्स : डॉ. बेनीवाल
एम्स में मनोरोग विभाग में चिकित्सक डॉ. जवाहर सिंह ने कहा कि बच्चों के चिड़चिड़ेपन की समस्या कॉमन हो गई है। जहां भी छोटे बच्चे हैं, वहां यह समस्या देखने में आ रहे है। इसका एक ही समाधान है कि बच्चे का शेड्यूल तय हो और उसकी इंडोर एक्टिविटी बढ़े। यह परिजनों को तय करना होगा कि इंडोर एक्टिविटी क्या हो सकती हैं। परिजन बच्चों को समय देंगे तो चिड़चिड़ाहट में कमी आएगी और वह जैसे लॉकडाउन से पहले थे, वैसे ही हो जाएंगे। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आरपी बेनीवाल ने कहा कि बच्चों का चिड़चिड़ापन दूर करने के लिए टीवी मनोरंजनात्मक कार्यक्रम दिखाएं। इसके अलावा ऐसे इंडोर गेम खेलें जिसमें ज्यादा देर तक व्यस्त रहा जा सकंे।
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