गलत रिपोर्ट देने से प्राइवेट लैब के प्रति लोगों का रुझान हुआ है कम

कोरोना वायरस की गलत रिपोर्ट दिए जाने के बाद शहर की प्राइवेट लैब के प्रति लोगों की रूचि कम हो गई है। पहले जहां गवर्नमेंट व प्राइवेट दोनों की जगह एक दिन में 200 से ज्यादा सैंपल लिए जाते थे, वहीं अब पिछले कुछ दिनों से सरकारी हॉस्पिटल की लैब के सैंपल 150 से 200 प्रतिदिन है। जबकि निजी लैब में सैंपल देने के लिए पहुंचने वाले लोगों की संख्या में रिकॉर्ड कटौती दर्ज की गई है। मंगलवार को जिला की 5 निजी लैब में कुल 19 लोगों ने जांच करवाई,जबकि सरकारी लैब से जांच के लिए 199 सैंपल भेजे गए।

इसी तरह बुधवार को भी निजी लैब में 36 लोग सैंपल देने पहुंचे, वहीं सरकारी लैब में संदिग्ध सैंपल 204 भेजे गए थे। गुरुवार को निजी लैब में 39 और सरकारी लैब में 187 सैंपल पुष्टि के लिए भेजे गए। सैंपल क्लेक्शन टीम के इंचार्ज ने बताया कि कोई भी इन दिनों बीमारी से समझौता नहीं करना चाहता। एक ओर जहां प्राइवेट लैब में एक सैंपल के लिए सरकार की ओर से 4500 रुपए फिक्स किए गए है, वहीं सरकारी लैब में नि:शुल्क जांच होती है। इसके अलावा प्राइवेट लैब से मिली रिपोर्ट के बाद भी सरकारी लैब से जांच करवाई जाती है। कई बार देखने में आया है कि निजी लैब ने पॉजिटिव लोगों की निगेटिव रिपोर्ट भी दी थी।



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