राजधानी में शराब के सभी ब्रांडों की एमआरपी पर 70 प्रतिशत का स्पेशल कोरोना शुल्क लगाने पर दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में कहा कि शराब का व्यापार और उसका उपभोग करना मौलिक अधिकार नहीं है और सरकार के पास इसकी बिक्री को नियंत्रित करने का अधिकार है। सरकार ने कहा कि शराब के सभी ब्रांडों की एमआरपी पर 70 प्रतिशत का विशेष कोरोना शुल्क इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि वह जनता को एक विशेष सुविधा उपलब्ध करा रही है।
सरकार ने शराब पर विशेष कोरोना शुल्क लगाने संबंधी चार मई की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं का विरोध किया और कहा कि शराब की बिक्री में मामले में विशेषाधिकार है और सरकार आबकारी कानून के तहत इसे नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र है। यह विशेष कोरोना शुल्क इसी विशेष सुविधा मुहैया कराने के लिए लिया जा रहा है। बता दें अदालत में इन याचिकाओं को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
दिल्ली सरकार ने कहा कि एक नागरिक के पास शराब का कारोबार करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, जबकि राज्य के पास ऐसे कारोबार को नियंत्रित करने के साथ ही शराब की बिक्री, खरीद और उपभोग को नियंत्रित करने का भी अधिकार है। उसने कहा कि दिल्ली के अलावा 10 अन्य राज्यों असम, मेघालय, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने भी ऐसे ही शुल्क लागू किए। हलफनामे में कहा गया है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के कारण सभी आर्थिक गतिविधियां बंद होने से दिल्ली सरकार का राजस्व अप्रैल 2020 में करीब 90 फीसदी तक गिर गया।
टिड्डियों के हमले की आशंका के मद्देनजर अलर्ट
दिल्ली सरकार ने टिड्डियों के दल की संभावित हमले की आशंका के मद्देनजर सभी एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिया है। विकास मंत्री मंत्री गोपाल राय ने सभी राजस्व कमिश्नर, जिलाधिकारियों, तीनों एमसीडी और एनडीएमसी को एडवाइजरी जारी कर अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कृषि और हॉर्टिकल्चर विभाग को दवाओं के छिड़काव के साथ किसानों को टिड्डियों के संभावित हमले से होने वाले नुकसान की आशंका के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया है।
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