दिल्ली में बिगड़ती स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि पॉश इलाके शालीमार बाग के बीके-1 ब्लॉक में 70 साल के बुजुर्ग और 67 साल की पत्नी व 8 साल और 4 साल के पोते-पोती 28 अप्रैल से होम क्वारेन्टाइन थे। क्योंकि उनकी बहू और बेटा प्राइवेट टेस्ट कराने पर पॉजिटिव पाए गए थे और अस्पताल में भर्ती थे। प्रशासन ने इन दोनों वरिष्ठ नागरिक और बच्चों का कोई टेस्ट नहीं किया था। 5 मई को बुजुर्ग व्यक्ति को बुखार हुआ और 6 मई की रात में उनकी मृत्यु हो गई।
एक बुजुर्ग महिला और दो छोटे बच्चे उस शव के साथ बैठे रहे लेकिन प्रशासन में हर स्तर पर परिवार और पड़ोसियों ने फोन किया लेकिन शव जांच के लिए ले जाने में 12 घंटे का समय लग गया। भास्कर ने बीके-1/107सी, शालीमार बाग इस बुजुर्ग के पड़ोसी राज रोशन झा से बात की। रोशन झा ने बताया कि प्रशासन की आखिर क्या तैयारी है। पहले अगर परिवार के लोगों की जांच करा लेते तो बुजुर्ग की जान नहीं जाती। अभी भी परिवार में तीन लोग बचे हैं, उनकी जांच नहीं कराई गई है।
शालीमार बाग के पार्षद तिलकराज कटारिया से भास्कर ने बात की तो उन्होंने बताया कि एसएचओ, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट से लगातार बात करने के बाद 7 मई को दोपहर 3-3:30 बजे के बीच संजय गांधी अस्पताल से एम्बुलेंस आई जो शव ले गई। उन्होंने बताया कि देरी के पीछे एसएचओ ने बताया है कि जो एम्बुलेंस आ रही थी उसका कोई कर्मी रेड लाइट पर उतरकर भाग गया। फिर दूसरे कर्मचारी को बुलाया गया।
संक्रमित कोरोना वॉरियर मांगता रहा मदद, नहीं मिली मदद
दूसरा मामला रोहिणी सेक्टर-27 निवासी मुकेश कुमार का है। मुकेश ने वीडियो जारी करके कहा कि मैं कोरोना में लोगों की जरूरत पड़ने पर देशहित में काम करने का फैसला किया। माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट मौलाना आजाद कॉलेज के कोविड लैब में काम कर रहा था। लक्षण लगे और 29 अप्रैल को टेस्ट का रिजल्ट मिला कि संक्रमित हूं, अगले दिन होम क्वारेन्टाइन हुआ। हेल्पलाइन नंबर 1075 से दिल्ली हेल्पलाइन और डीएसओ का नंबर जिस पर मदद नहीं मिली। वाट्सएप पर मैसेज करके होम क्वारेन्टाइन हुआ। मेरे घर में कोई डॉक्टर टीम नहीं आई, किसी ने संपर्क नहीं किया।
सीएम ने कहा था कि दिल्ली कोरोना से लड़ने को तैयार हैं। मेरा कहना है कि स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित होता है तो मदद नहीं करते, फिर कैसे तैयार हैं। लाउडस्पीकर पर कहा जाता है कि आपकी गली में संक्रमित है। मेरे पिता का किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। भावना आहत हुई। मेरा कहना है कि होम क्वारेन्टाइन वाले से प्रशासन बात करें, पूछें तो सही आखिर क्या दिक्कत है। किसी व्यक्ति ने मुझसे नहीं किया। अगर कोई संक्रमित पाया जाए तो बीमारी से लड़ना है, बीमार से नहीं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3bgLYmb
via IFTTT
Comments
Post a Comment