वित्तीय वर्ष 2007 में उच्चतम था इक्विटी रिटर्न
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2003 में इक्विटी रिटर्न 16.8% पर था जो वित्त वर्ष 2007 में 22.9% पर पहुंच गया था। इक्विटी रिटर्न और कमाई में बढ़ोतरी मार्केट कैपटीलाइजेशन को बढ़ाने के लिए अच्छे माने जाते हैं। 2008-09 में आई वैश्विक वित्तीय मंदी के बाद से बीएसई 500 कंपनियों के इक्विटी रिटर्न में गिरावट आ रही है। वित्तीय वर्ष 2019 में यह 9.5% पर रही जो पिछले 16 साल का न्यूनतम स्तर है। 2008 में आई मंदी से मैक्रो और माइक्रोइकोनॉमिक स्थितियां खराब हुईं और इसमें गिरावट देखने को मिली। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक सेक्टर बैंक, टेलीकॉम और ऑटो सेक्टर काे छोड़कर बाकी में वित्त वर्ष 2015 से सुधार देखने को मिल रहा है।
इक्विटी रिटर्न बताता है कि मैनेजमेंट शेयरहोल्डर की पूंजी का इस्तेमाल कैसे कर रहा
इक्विटी रिटर्न लाभ को जानने का एक तरीका है जिससे यह गणना की जाती है कि शेयरहोल्डर इक्विटी के एक रुपए के बदले कंपनी के लाभ में कितने रुपए कमाए। आमतौर पर इक्विटी रिटर्न को लाभ से ज्यादा कंपनी की क्षमता जानने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह बताता है कि कंपनी मैनेजमेंट शेयरहोल्डर की पूंजी का इस्तेमाल कैसे कर रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो ज्यादा इक्विटी रिटर्न कंपनी के लिए बेहतर माना जाता है।
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